चंपावत: खाद के लिए अब मोबाइल जरूरी! डिजिटल व्यवस्था में उलझे किसान, सुविधा से ज्यादा बढ़ी परेशानी!

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चंपावत। सरकार ने उर्वरक वितरण व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए ‘फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल’ मोबाइल ऐप लागू कर दिया है। दावा किया गया है कि इससे कालाबाजारी रुकेगी और सब्सिडी का लाभ वास्तविक किसानों तक पहुंचेगा। लेकिन चंपावत जैसे पर्वतीय जिलों में यह व्यवस्था किसानों के लिए राहत से ज्यादा नई मुश्किल बनती दिखाई दे रही है।
नई व्यवस्था के तहत किसान को पहले मोबाइल ऐप पर पंजीकरण कर खाद की बुकिंग करनी होगी। इसके बाद मिलने वाले क्यूआर कोड के आधार पर ही अधिकृत विक्रेता खाद देगा। समस्या यह है कि बड़ी संख्या में किसान, खासकर बुजुर्ग और सीमांत किसान, न तो स्मार्टफोन रखते हैं और न ही ऐप चलाना जानते हैं। कमजोर इंटरनेट नेटवर्क ने उनकी परेशानी और बढ़ा दी है।
खाद केंद्रों पर कई किसान सिर्फ इसलिए मायूस लौट रहे हैं क्योंकि वे डिजिटल प्रक्रिया पूरी नहीं कर पा रहे हैं। सवाल उठ रहा है कि जब किसान के पास स्मार्टफोन ही नहीं है, तो वह खाद कैसे खरीदे?

सरकार का उद्देश्य पारदर्शिता लाना है, लेकिन यदि व्यवस्था के कारण जरूरतमंद किसान ही खाद से वंचित होने लगें तो इसकी उपयोगिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल व्यवस्था के साथ-साथ ऑफलाइन पंजीकरण, सहकारी समितियों में सहायता केंद्र और बुजुर्ग किसानों के लिए विशेष व्यवस्था भी होनी चाहिए।
इस संबंध में सहकारिता निबंधक अधिकारी प्रेम प्रकाश से दूरभाष पर बातचीत की गई। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है। हालांकि, जब उनसे डिजिटल संसाधनों से वंचित किसानों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था के बारे में पूछा गया तो कोई स्पष्ट या ठोस जवाब नहीं मिला।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है— क्या पारदर्शिता के नाम पर खाद पाने के लिए स्मार्टफोन अनिवार्य कर दिया गया है, या फिर सरकार जल्द ही उन लाखों किसानों के लिए भी रास्ता निकालेगी, जिनके हाथ में आज भी केवल खेती के औजार हैं, स्मार्टफोन नहीं?

फोटो_ स्मार्टफोन और क्यूआर कोड आधारित नई व्यवस्था को समझने का प्रयास करते किसान।


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