चंपावत: सीमांत गांवों की सादगी और राष्ट्रभक्ति ने “माय भारत” टीम को किया भावुक।

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आईटीबीपी के सहयोग से बदली तस्वीर, ग्रामीणों के जीवन, संस्कृति और आत्मनिर्भरता से प्रभावित हुए युवा।

लोहाघाट। उच्च हिमालयी सीमांत क्षेत्रों के भ्रमण पर पहुंचे “माय भारत” के युवाओं ने यहां के ग्रामीण जीवन, राष्ट्रभक्ति और प्रकृति के प्रति समर्पण को देखकर गहरी भावनाएं व्यक्त की। दुर्गम परिस्थितियों में जीवनयापन करने के बावजूद ग्रामीणों के चेहरे पर मौजूद संतोष और मुस्कान ने युवाओं को आश्चर्यचकित कर दिया। उनका कहना था कि सीमांत क्षेत्र के लोगों की हर सांस में देशभक्ति, परिश्रम और प्रकृति प्रेम का भाव दिखाई देता है। भ्रमण के दौरान युवाओं ने ग्रामीणों के साथ संवाद स्थापित किया, स्थानीय जीवनशैली को नजदीक से समझा और गांवों में पौधारोपण कर अपनी यादें भी छोड़ीं। इस दौरान उन्होंने ग्रामीण बच्चों के साथ लोकनृत्य कर आनंद के पल साझा किए और गांवों को प्लास्टिक मुक्त बनाने का संदेश भी दिया। युवाओं ने कहा कि इतनी सुंदर और स्वच्छ वादियों में पॉलिथीन के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए। ग्रामीणों ने बताया कि सीमांत क्षेत्रों में आईटीबीपी की मौजूदगी उनके जीवन में नई ऊर्जा लेकर आई है। गांवों में सोलर लाइट की व्यवस्था, स्वास्थ्य सुविधाएं, शिक्षा और रोजगार के अवसर बढ़े हैं। उन्होंने कहा कि आईटीबीपी के चिकित्सक हमेशा उनकी मदद के लिए तैयार रहते हैं और जरूरत पड़ने पर स्थानीय जड़ी-बूटियों का ज्ञान भी उनके काम आता है।
“माय भारत” टीम ने माना कि सीमांत क्षेत्र के लोग प्रकृति के सच्चे वैज्ञानिक हैं। वे मौसम के बदलाव को हवा के रुख से समझ लेते हैं और पारंपरिक ज्ञान के आधार पर स्वास्थ्य व कृषि से जुड़े निर्णय लेते हैं। खेती, पशुपालन और जड़ी-बूटियों के उपयोग में उनकी दक्षता किसी विशेषज्ञ से कम नहीं है। युवाओं ने यह भी देखा कि प्रदेश के अन्य हिस्सों की तरह यहां पलायन की समस्या उतनी प्रभावी नहीं है। गांव छोड़कर बाहर गए लोग भी हर वर्ष अपनी माटी, लोकदेवताओं और सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने के लिए वापस लौटते हैं। अपने गांव और परंपराओं के प्रति यह लगाव भ्रमण दल को गहराई से प्रभावित कर गया। ग्रामीणों ने बताया कि आईटीबीपी की 36वीं वाहिनी के कमांडेंट संजय कुमार जब कभी यहां के दौरे पर आते रहते हैं उनका हम अपने फौजी भाई की तरह स्वागत करते हैं। भ्रमण दल को इस बात पर भी और हैरानी हुई की इसी पथरीली भूमि में स्थित गुंजी गांव के संजय गुंज्याल आईपीएस अधिकारी हैं जो वर्तमान में आईटीबीपी के अपर महानिदेशक के पद पर कार्यरत हैं। इनके तथा उत्तराखंड सरकार के विजनरी सचिव डॉ. पुरुषोत्तम की जुगलबंदी ने सीमांत क्षेत्रों में विकास और स्वरोजगार को नई दिशा मिली है। श्री गुंज्याल के आइटीबीपी में शामिल होने के बाद इस उच्च हिमालयी क्षेत्रों की परिस्थितियों, जनभावनाओं एवं लोगों को रोजगार से जोड़ने के साथ ही जड़ों से बांधे रखने की महत्त्वपूर्ण पहल की जा रही है। जिसके परिणाम सामने हैं। भ्रमण दल ने गहराई के साथ यह एहसास किया कि आज यहां के लोग प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा सीमांत क्षेत्रों को अपना “मायका” बनाए जाने से भी बेहद खुश हैं तथा उनकी भविष्य की उम्मीदें बढ़ी हैं।


फोटो –  सीमांत गांव में स्थानीय बच्चों और ग्रामीणों के साथ लोकनृत्य कर सांस्कृतिक रंग में रंगे माय भारत टीम के सदस्य तथा यहां की उपलब्ध जड़ी बूटियों की जानकारी लेते हुए।


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