चपावत: पशुपालकों की पीड़ा पर चुप क्यों है दुग्ध संघ?

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15 दिन का अल्टीमेटम, समाधान नहीं हुआ तो आंचल डेयरी के गेट पर दूध बहाने की चेतावनी

चंपावत। पहाड़ में पशुपालन को स्वरोजगार और पलायन रोकने का जरिया बनाने के सरकारी प्रयासों के बीच पशुपालकों की समस्याओं ने दुग्ध संघ की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पाटी विकासखंड के एक पशुपालक नेता ने चंपावत दुग्ध संघ से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए अधिकारियों को 15 दिन का समय दिया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आंचल डेयरी के गेट पर सामूहिक प्रदर्शन किया जाएगा और जरूरत पड़ी तो सड़क पर दूध बहाकर विरोध जताया जाएगा।

पशुपालक नेता राजेश बिष्ट के अनुसार वह पिछले करीब ढाई वर्षों से डेयरी व्यवसाय से जुड़े हैं और वर्तमान में करीब 45 पशु पाल रहे हैं। उनका दावा है कि क्षेत्र में उनके प्रयासों से कई दुग्ध समितियां और डेयरियां संचालित हुई हैं। इसके बावजूद पशुपालकों को मूलभूत सुविधाओं और उचित व्यवस्था के लिए परेशान होना पड़ रहा है।
पशुपालकों की प्रमुख शिकायत साइलेज, भूसा और पशु आहार की नियमित उपलब्धता को लेकर है। आरोप है कि मांग करने पर कई बार आपूर्ति ऊपर से बंद होने की बात कही जाती है। वहीं दूध के दाम बढ़ाने की मांग पर अनुमति नहीं होने का हवाला दिया जाता है। दूध फटने की शिकायतों के समाधान को लेकर भी पशुपालक नेता ने सवाल उठाए हैं।

दुग्ध परिवहन व्यवस्था को लेकर भी उन्होंने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि परिवहन से जुड़े मामलों में अनियमितताओं की जानकारी जुटाई जा रही है और अगले 15 दिनों में संबंधित तथ्यों को सार्वजनिक किया जाएगा। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और दुग्ध संघ का पक्ष सामने नहीं आया है।
पशुपालक नेता का कहना है कि जब सरकार युवाओं को डेयरी और पशुपालन से जोड़कर स्वरोजगार को बढ़ावा दे रही है, ऐसे में पशुपालकों को चारा, पशु आहार, उचित दुग्ध मूल्य और तकनीकी सहयोग मिलना जरूरी है। उन्होंने

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और पशुपालन मंत्री सौरभ बहुगुणा तक मामला पहुंचाने की बात कही है।
उन्होंने क्षेत्र के पशुपालकों से अपनी समस्याएं लिखित रूप में देने की अपील की है। अब देखना होगा कि 15 दिन की समय-सीमा के भीतर दुग्ध संघ इन शिकायतों का समाधान करता है या फिर आंचल डेयरी के गेट पर प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन से मामला और गरमाता है।

फोटो_राजेश बिष्ट।


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