

76 मदरसों को स्कूल के रूप में मान्यता, 114 आवेदन प्रक्रियाधीन; 250 अवैध मदरसे पहले ही किए जा चुके हैं सील।
देहरादून, 21 अक्टूबर। उत्तराखंड में मदरसों की शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है। स्कूल के रूप में मान्यता प्राप्त मदरसों में अब शुक्रवार के बजाय रविवार को साप्ताहिक अवकाश रहेगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि मान्यता प्राप्त मदरसों को शिक्षा विभाग और उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के निर्धारित नियमों का पालन करना होगा। नियमों की अनदेखी करने वाले संस्थानों को संचालन की अनुमति नहीं दी जाएगी।
राज्य सरकार के अनुसार, इस बदलाव का उद्देश्य सभी बच्चों को समान अवसर उपलब्ध कराना और अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में निर्धारित शैक्षिक मानकों के अनुरूप व्यवस्था लागू करना है। सरकार चाहती है कि बच्चे आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण और राष्ट्रीय पाठ्यक्रम आधारित शिक्षा प्राप्त कर मुख्यधारा की शिक्षा व्यवस्था से जुड़ सकें।
मदरसा बोर्ड खत्म, अब नई व्यवस्था में संचालन_
राज्य सरकार ने उत्तराखंड मदरसा बोर्ड को समाप्त कर उसके स्थान पर अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के तहत नई व्यवस्था लागू की है। इसके अंतर्गत मुस्लिम, सिख, जैन, बौद्ध और पारसी सहित विभिन्न अल्पसंख्यक समुदायों के शिक्षण संस्थानों को निर्धारित शैक्षिक मानकों के अनुरूप संचालित करने की व्यवस्था की गई है।
सरकार के मुताबिक, पहले उत्तराखंड मदरसा बोर्ड से 452 मदरसे मान्यता प्राप्त थे। नई व्यवस्था के तहत पुनः आवेदन करने वाले संस्थानों में से अब तक 76 को स्कूल के रूप में मान्यता दी जा चुकी है, जबकि 114 आवेदन शिक्षा विभाग में प्रक्रियाधीन हैं।
चार जिलों के 76 संस्थानों को मिली मान्यता_
उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह गांधी के अनुसार, अब तक मान्यता प्राप्त 76 संस्थानों में देहरादून के छह, हरिद्वार के 44, नैनीताल के दो और ऊधमसिंह नगर के 24 संस्थान शामिल हैं।
मान्यता प्राप्त संस्थानों को शिक्षा विभाग और प्राधिकरण के सभी निर्धारित नियमों का पालन करना होगा। इनमें साप्ताहिक अवकाश और शैक्षिक संचालन से संबंधित व्यवस्थाएं भी शामिल हैं। बिना आवश्यक मान्यता और अनुमति के किसी संस्थान का संचालन नहीं किया जा सकेगा।
250 अवैध मदरसों पर हो चुकी है कार्रवाई_
अल्पसंख्यक विभाग के सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते के अनुसार, राज्य सरकार ने पहले चरण में 250 अवैध मदरसों को सील किया था। ये संस्थान मदरसा बोर्ड में भी पंजीकृत नहीं थे। सरकार ने स्पष्ट किया है कि शिक्षण संस्थानों का संचालन निर्धारित मानकों के अनुसार होना चाहिए, ताकि बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा और भविष्य से समझौता न हो।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार सभी बच्चों को समान अवसर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्कूल के रूप में मान्यता प्राप्त मदरसों पर भी शिक्षा विभाग के निर्धारित नियम उसी तरह लागू होंगे, जैसे अन्य मान्यता प्राप्त स्कूलों पर होते हैं।
मुख्यमंत्री के अनुसार, निर्धारित शैक्षिक मानकों और नियमों का पालन सभी संबंधित संस्थानों के लिए अनिवार्य है। नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों को संचालन की अनुमति नहीं दी जाएगी। सरकार का लक्ष्य उत्तराखंड के प्रत्येक बच्चे को आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण और रोजगारपरक शिक्षा उपलब्ध कराना है, ताकि वह भविष्य में बेहतर अवसर हासिल कर सके और राष्ट्र निर्माण में योगदान दे सके।

फोटो_मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी।



