

चंपावत। चंपावत के सात प्राचीन शिवधामों को जोड़कर सप्तकोशी परिक्रमा विकसित करने की दिशा में सरकारी स्तर पर हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चंपावत में जल्द सप्तकोशी परिक्रमा शुरू करने की तैयारी की बात कही है। मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद जिले के धार्मिक पर्यटन को नई दिशा मिलने की उम्मीद जगी है।
प्रस्तावित सप्तकोशी परिक्रमा में बालेश्वर, ताड़केश्वर, डिप्टेश्वर, मानेश्वर, क्रांतेश्वर, हरेश्वर और ऋषेश्वर जैसे प्राचीन शिवधामों को जोड़ा जाएगा। इन धार्मिक स्थलों को एक व्यवस्थित सर्किट के रूप में विकसित कर चंपावत की सदियों पुरानी धार्मिक विरासत को पर्यटन से जोड़ने की तैयारी है।
सप्तकोशी परिक्रमा को लेकर जिलाधिकारी मनीष कुमार लगातार सक्रिय रहे हैं। चंपावत के इन प्राचीन शिवधामों की धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन संभावनाओं को लेकर डीएम ने लगातार मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तक बात पहुंचाई। प्रशासनिक स्तर पर इस परिक्रमा के महत्व को प्रमुखता से रखा गया, जिसके बाद अब मुख्यमंत्री के स्तर से सप्तकोशी परिक्रमा शुरू करने के संकेत मिले हैं।
सप्तकोशी परिक्रमा के आकार लेने से सातों शिवधामों में सड़क संपर्क, पेयजल, पार्किंग, स्वच्छता और अन्य यात्री सुविधाओं के विस्तार की उम्मीद है। श्रद्धालुओं के लिए बेहतर मार्गदर्शन और डिजिटल सूचना व्यवस्था विकसित होने से बाहर से आने वाले पर्यटकों को भी सुविधा मिलेगी।
मानेश्वर धाम को प्रस्तावित सर्किट का अहम पड़ाव माना जा रहा है। स्थानीय मान्यता के अनुसार यहां स्थित नौली के जलस्रोत का संबंध मानसरोवर से माना जाता है। धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व के इस क्षेत्र में आध्यात्मिक पर्यटन की भी व्यापक संभावनाएं हैं।
मुख्यमंत्री ने चंपावत आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के बेहतर आतिथ्य पर भी जोर दिया है। उनका कहना है कि यहां आने वाले लोग सुखद अनुभव लेकर लौटें, ताकि वे दोबारा चंपावत आएं और अन्य लोगों को भी यहां आने के लिए प्रेरित करें।
सप्तकोशी परिक्रमा का लाभ स्थानीय लोगों तक पहुंचाने के लिए युवाओं को पर्यटन, गाइड और परिवहन सेवाओं से जोड़ने के साथ महिला स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों, स्थानीय हस्तशिल्प, पारंपरिक भोजन और होमस्टे को भी बढ़ावा मिल सकता है।
अब मुख्यमंत्री के बयान के बाद सप्तकोशी परिक्रमा केवल चर्चा का विषय नहीं रह गई है। डीएम की पहल और सरकार के स्तर पर बढ़ती सक्रियता ने उम्मीद जगा दी है कि चंपावत की यह धार्मिक विरासत जल्द ही एक संगठित पर्यटन सर्किट के रूप में जमीन पर दिखाई दे सकती है।




