चंपावत: उत्तराखंड में बेरोजगार 1.25 लाख, लेकिन खाली पड़ी हैं 2.5 लाख नौकरियां- राजशेखर जोशी।

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सेतु आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष बोले युवाओं को नौकरी तलाशने वाला नहीं, रोजगार देने वाला बनना होगा; स्थानीय संसाधनों पर आधारित उद्योगों में अपार संभावनाएं।

चंपावत। उत्तराखंड में विकास, रोजगार और उद्यमिता की अपार संभावनाएं मौजूद हैं, आवश्यकता केवल दूरदर्शी सोच और प्रभावी क्रियान्वयन की है। यह बात सेतु आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष, सार्वजनिक नीति विशेषज्ञ एवं कॉरपोरेट जगत की प्रतिष्ठित हस्ती राजशेखर जोशी ने मॉडल जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के भ्रमण के दौरान कही।
उन्होंने कहा कि विभिन्न सर्वेक्षणों में सामने आया है कि उत्तराखंड में लगभग सवा लाख युवा बेरोजगार हैं, जबकि राज्य में करीब ढाई लाख रोजगार के अवसर उपलब्ध हैं। समस्या अवसरों की कमी नहीं, बल्कि युवाओं की रुचि, कौशल और उपलब्ध रोजगार के बीच समन्वय की है। इसी दिशा में सेतु आयोग ने पिछले दो वर्षों के दौरान कई नवाचार आधारित विकास और रोजगार मॉडल तैयार किए हैं, जिन्हें भारत सरकार के नीति आयोग ने भी सराहा है।
राजशेखर जोशी ने बताया कि आयोग लगातार युवाओं से संवाद कर उनकी रुचि, क्षमता और कौशल का आकलन कर रहा है। इसके लिए प्रतिष्ठित संस्थाओं को उत्तराखंड से जोड़ा गया है, जो युवाओं को उनके घर के आसपास ही रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की वन संपदा का उपयोग कर सहारनपुर जैसे शहरों में बड़े उद्योग संचालित हो रहे हैं, जबकि राज्य स्वयं इस क्षेत्र में रोजगार सृजन की अपार संभावनाएं रखता है। इसी तरह मधुमक्खी पालन के लिए आवश्यक बॉक्स भी बाहरी राज्यों से मंगाए जा रहे हैं, जबकि उनका निर्माण स्थानीय स्तर पर कर हजारों युवाओं को रोजगार दिया जा सकता है।
उन्होंने जोर देते हुए कहा कि युवाओं को केवल 10-15 हजार रुपये की नौकरी पाने की मानसिकता से बाहर निकलना होगा। उन्हें अपनी क्षमता पहचानकर उद्यमिता की ओर बढ़ना चाहिए, ताकि वे स्वयं रोजगार प्राप्त करने के साथ-साथ दूसरों को भी रोजगार दे सकें।
जोशी ने कहा कि उत्तराखंड में कृषि, बागवानी, जैविक उत्पाद, पर्यटन, कुटीर उद्योग और नवाचार आधारित उद्यमों में असीम संभावनाएं हैं। वर्ष 2047 तक उत्तराखंड देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देने की क्षमता रखता है। उन्होंने एक सर्वेक्षण का हवाला देते हुए चिंता जताई कि राज्य के लगभग 45 प्रतिशत जल स्रोत सूख चुके हैं। जल संरक्षण, टिकाऊ खेती और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को उन्होंने भविष्य की सबसे बड़ी चुनौती बताया। इस दौरान उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे किसानों और उद्यमियों की सराहना की जो अपने पुरुषार्थ और नवाचार के बल पर न केवल अपनी तकदीर बदल रहे हैं, बल्कि अन्य लोगों के लिए भी प्रेरणा बन रहे हैं। किसान नेता नरेंद्र मेहरा ने बताया कि सेतु आयोग द्वारा जंगली जानवरों से खेती की सुरक्षा के लिए किए गए नवाचारों के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं, जिससे किसान दोबारा खेती की ओर लौटने लगे हैं। राजशेखर जोशी ने कहा कि यदि युवाओं की रुचि और क्षमता के अनुरूप प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और अवसर उपलब्ध कराए जाएं तो उत्तराखंड रोजगार मांगने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला राज्य बन सकता है।

फोटो_लोगों से संवाद करते राजशेखर जोशी।


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