चंपावत: मां पूर्णागिरि का दिव्य आह्वान: आस्था के सागर में उमड़ रहे श्रद्धालु, चमत्कारिक अनुभूति से अभिभूत भक्त।

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6000 फीट की ऊंचाई पर बसे शक्तिपीठ में लाखों श्रद्धालुओं की भीड़, व्यवस्थाओं ने जीता दिल  मेले को सालभर चलाने की पहल का हुआ जोरदार स्वागत।

टनकपुर/चंपावत। हिमालय की गोद में लगभग 6000 फीट की ऊंचाई पर स्थित मां पूर्णागिरि मंदिर आज भी अपनी अद्भुत आध्यात्मिक शक्ति से देशभर के श्रद्धालुओं को चुंबक की तरह अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। सदियों से यह शक्तिपीठ आस्था का केंद्र बना हुआ है, जहां पहुंचकर भक्त न सिर्फ देवी के दर्शन करते हैं, बल्कि अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति का भी अनुभव करते हैं।
इस बार प्रमुख हिंदी दैनिक (केकेपी न्यूज़( के प्रधान संपादक प्रमोद कुमार अपनी टीम के साथ पहली बार इस पावन धाम पहुंचे। भीड़भाड़ और कठिन मार्ग के बावजूद टीम ने यहां की दिव्यता और व्यवस्था को करीब से महसूस किया। उन्होंने बताया कि “मां का बुलावा ही यहां तक लेकर आता है, और यहां आकर एक अलग ही ऊर्जा का अनुभव होता है।”
घने वनों के बीच बसे इस पवित्र स्थल पर हर साल लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। इस वर्ष भी मेले में अब तक लाखों भक्त दर्शन कर चुके हैं। खास बात यह रही कि भारी भीड़ के बावजूद व्यवस्थाएं सुव्यवस्थित नजर आईं। मेला प्रशासन और स्थानीय लोगों द्वारा श्रद्धालुओं का स्वागत मेहमानों की तरह किया जा रहा है, जो इस मेले की विशेष पहचान बन चुकी है। मेला मजिस्ट्रेट डॉ. ललित मोहन तिवारी लगातार व्यवस्थाओं पर नजर बनाए हुए हैं और श्रद्धालुओं से फीडबैक लेकर सुधार भी कर रहे हैं। वहीं जिलाधिकारी मनीष कुमार और पुलिस अधीक्षक रेखा यादव भी समय-समय पर मौके पर पहुंचकर व्यवस्थाओं का जायजा ले रहे हैं। दिल्ली, चंडीगढ़ समेत दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं ने पहली बार इस धाम के दर्शन कर इसे अद्भुत अनुभव बताया। कई श्रद्धालु ऐसे भी मिले जो हर वर्ष यहां पहुंचकर अपनी आस्था को और मजबूत करते हैं। पहाड़ों की ठंडी हवाएं और प्राकृतिक सुंदरता यात्रियों को मानसिक शांति का अहसास करा रही हैं। मेले के बढ़ते स्वरूप को देखते हुए अब इसे वैष्णो देवी मंदिर की तर्ज पर ट्रस्ट के रूप में विकसित करने की मांग भी जोर पकड़ने लगी है। साथ ही बनबसा से पूर्णागिरि तक पूरे क्षेत्र को “पूर्णागिरि मेला विकास प्राधिकरण” के अधीन लाने की भी आवाज उठ रही है। प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा मेले को वर्षभर आयोजित करने की घोषणा को श्रद्धालु दूरदर्शी कदम मान रहे हैं। इससे आने वाले समय में यहां श्रद्धालुओं की संख्या और सुविधाएं दोनों बढ़ने की उम्मीद है।


फोटो  – मां पूर्णागिरि के दर्शन के लिए लंबी कतार में अपनी बारी का इंतजार करते श्रद्धालु


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