पोस्टमार्टम के बाद बिसरा IVRI भेजा गया, रिपोर्ट से खुलेगा मौत का राज; डीएफओ बोले—पहले से बीमार होने के संकेत।
लोहाघाट। ग्रामीण क्षेत्र में बालिका पर हमले के बाद वन विभाग द्वारा रेस्क्यू कर सुरक्षित लाया गया गुलदार रहस्यमय परिस्थितियों में सुबह मृत पाया गया। गुलदार की मौत के कारणों का खुलासा अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट और बिसरा जांच के बाद ही हो सकेगा।
जानकारी के अनुसार पटोली गांव में एक बालिका पर गुलदार के हमले की सूचना मिलते ही वन क्षेत्राधिकारी रमेश चंद जोशी अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। टीम पिंजरा लगाने की तैयारी कर रही थी कि इसी दौरान नॉकोट गांव से सूचना मिली कि एक गुलदार पुराने खंडहर में छिपा हुआ है। सूचना पर पूरी टीम तत्काल नॉकोट पहुंची, जहां विशेषज्ञों ने गुलदार को ट्रैंक्विलाइज कर सुरक्षित पिंजरे में कैद किया और उसे लोहाघाट स्थित वन क्षेत्राधिकारी कार्यालय ले आए।
वन विभाग के अनुसार गुलदार को रातभर निगरानी में रखा गया और देर रात तक वह जीवित था। लेकिन बृहस्पतिवार सुबह निरीक्षण के दौरान वह मृत मिला। घटना की सूचना पर पशुपालन विभाग के चिकित्सकों का दो सदस्यीय दल मौके पर पहुंचा। डॉ. मोहम्मद खालिद और डॉ. शैलेश कुमार के पैनल ने गुलदार का पोस्टमार्टम किया। मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए उसका बिसरा भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI) भेज दिया गया है।
प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) आशुतोष सिंह ने बताया कि मृत गुलदार की उम्र लगभग आठ से नौ वर्ष आंकी गई है। प्रारंभिक तौर पर वह पहले से बीमार प्रतीत हो रहा था और संभवतः सुरक्षित स्थान की तलाश में आबादी वाले क्षेत्र में पहुंचा था। हालांकि मृत्यु के सही कारणों की पुष्टि पोस्टमार्टम और बिसरा जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी। वहीं सहायक वन संरक्षक (एसीएफ) नेहा चौधरी ने बताया कि रेस्क्यू के बाद देर रात तक गुलदार पूरी तरह जीवित था, लेकिन सुबह वह मृत अवस्था में मिला, जिससे मामले की गंभीरता को देखते हुए विस्तृत जांच कराई जा रही है।
फोटो_ पिंजरे में रेस्क्यू कर लोहाघाट लाया गया गुलदार।
चंपावत: बालिका पर हमले के बाद रेस्क्यू किया गया गुलदार रातभर जीवित रहा, सुबह वन विभाग कार्यालय में मिला मृत।
