चंपावत: “पहाड़ को उसके हाल पर छोड़ दिया गया, अब जागने का वक्त है”-  दरबार सिंह रजवार।

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गांव-गांव पैदल पहुंचकर लोगों से कर रहे संवाद, पहाड़ की समस्याओं का समाधान दिल्ली-देहरादून नहीं, पहाड़ की चौपाल से निकलेगा।

लोहाघाट। उत्तराखंड क्रांति दल को फिर से गांवों तक मजबूत करने और पलायन, बेरोजगारी तथा पर्वतीय क्षेत्रों की उपेक्षा के खिलाफ जनजागरण अभियान चला रहे युवा नेता दरबार सिंह रजवार इन दिनों लगातार दूरस्थ गांवों का पैदल भ्रमण कर लोगों से संवाद कर रहे हैं। उनका कहना है कि राज्य गठन के 26 वर्ष बाद भी पहाड़ बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहा है, जबकि विकास का बड़ा हिस्सा मैदानी क्षेत्रों तक सीमित रह गया है। रजवार ने कहा कि विडंबना देखिए, जहां ऊधमसिंह नगर में एयरपोर्ट जैसी सुविधाओं की मांग हो रही है, वहीं पहाड़ के लोग आज भी टूटी पगडंडियों और सड़क के अभाव में मरीजों को डोली में अस्पताल पहुंचाने को मजबूर हैं। यही असमान विकास लोगों को अपनी जन्मभूमि छोड़ने पर विवश कर रहा है।
उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों की समस्याएं मैदानों से पूरी तरह अलग हैं, इसलिए पहाड़ के लिए अलग सोच और स्थानीय जरूरतों के अनुरूप विकास नीति बननी चाहिए।

उनका कहना है कि गांवों में किसान कड़ी मेहनत से सब्जियां और कृषि उत्पाद तैयार करते हैं, लेकिन सड़क और परिवहन के अभाव में उन्हें आज भी कंधों पर ढोकर बाजार तक पहुंचाना पड़ता है।

रजवार ने कहा कि पहाड़ में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, लेकिन अवसर और संसाधनों के अभाव में युवा पलायन कर रहे हैं या फिर नशे की गिरफ्त में फंस रहे हैं। उन्होंने इसे केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि सामाजिक संकट बताते हुए कहा कि यदि समय रहते गंभीर प्रयास नहीं किए गए तो गांव खाली होते जाएंगे। उन्होंने कहा कि पहाड़ का विकास तभी संभव है, जब योजनाएं पहाड़ की चौपालों में बैठकर स्थानीय लोगों की जरूरतों के आधार पर बनाई जाएं। इसके लिए समाज और सरकार दोनों को मिलकर आगे आना होगा।

फोटो_युवा नेता दरबार सिंह रजवार।


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