

जन्माष्टमी पर निकलेगी ऐड़ी गोपाल-कृष्ण की भव्य शोभायात्रा, झोड़ा-कलश यात्रा और जागरण ने बांधा समां।
लोहाघाट। लधियाघाटी की समृद्ध लोकसंस्कृति, आध्यात्मिक आस्था और सदियों पुरानी परंपराओं का प्रतीक प्रसिद्ध ऐड़ी बालकृष्ण मेला गुरुवार को भिंगराड़ा में धूमधाम से शुरू हो गया। तीन दिवसीय मेले का शुभारंभ आध्यात्मिक गुरु प्रेम सुगंध महाराज एवं ब्लॉक प्रमुख शंकर सिंह अधिकारी ने किया। इस मौके पर क्षेत्र की लोक संस्कृति और परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संकल्प लिया गया।
आध्यात्मिक गुरु प्रेम सुगंध महाराज ने कहा कि क्षेत्रवासी आपसी सहयोग से श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की खुशियों को मेले का स्वरूप देकर पूर्वजों की परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने आयोजन समिति और क्षेत्रवासियों को इस पावन परंपरा को जीवंत रखने के लिए बधाई एवं आशीर्वाद दिया।
ब्लॉक प्रमुख शंकर सिंह अधिकारी ने कहा कि ऐड़ी बालकृष्ण जैसे आयोजन समाज को एकजुट करने के साथ युवा पीढ़ी को अपनी संस्कृति, परंपराओं और लोक विरासत से जोड़ने का काम करते हैं। उन्होंने मेले के आयोजन के लिए क्षेत्रवासियों को शुभकामनाएं दीं।
ग्राम प्रधान गीता भट्ट की अध्यक्षता और उमेश भट्ट के संचालन में हुए उद्घाटन समारोह में स्थानीय महिलाओं ने पारंपरिक झोड़ा नृत्य की शानदार प्रस्तुति देकर माहौल को लोक रंग में रंग दिया। आयोजन समिति की ओर से मुख्य अतिथियों को स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया।
इस दौरान दर्जा राज्य मंत्री मुकेश महराना, निर्मला जोशी, चंद्रशेखर जोशी, ममता भट्ट, कमल भट्ट, गीता, ज्योति कुंवर, कृष्ण चंद्र भट्ट, टीकाराम शर्मा,घनश्याम शर्मा और दीपक शर्मा ने अतिथियों का भावपूर्ण स्वागत किया।
मेले के पहले दिन महिलाओं ने आंचलिक परिधानों में भव्य कलश यात्रा निकाली। स्वर्गीय बाला दत्त भट्ट की स्मृति में सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसका सौजन्य उनकी धर्मपत्नी सुनीता भट्ट ने किया। इसके साथ ही कला प्रतियोगिता भी हुई। देर शाम भगवान ऐड़ी देवता का जागरण आयोजित किया गया, जिसमें लधियाघाटी के दूरदराज गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।
जन्माष्टमी पर निकलेगी भव्य शोभायात्रा_
मेले के मुख्य आकर्षण के रूप में जन्माष्टमी के दिन भगवान ऐड़ी गोपाल-कृष्ण की भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। शोभायात्रा भिंगराड़ा गांव और खरही से निकलेगी। इसमें लधियाघाटी के विभिन्न गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की उम्मीद है। धार्मिक आस्था के साथ लोकगीत, लोकनृत्य और पारंपरिक वेशभूषा मेले की सांस्कृतिक छटा को और खास बनाएंगे।
फोटो_ऐड़ी बालकृष्ण मेले के शुभारंभ पर मुख्य अतिथियों को स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित करते आयोजन समिति के पदाधिकारी।




