

33 साल पुराना किस्सा, तत्कालीन छात्रसंघ अध्यक्ष भास्कर मुरारी की छात्रहित की पहल आज भी याद।
लोहाघाट। छात्रसंघ अध्यक्ष का पद संभालने के बाद तेवर बदलने की चर्चाएं भले ही आज आम हों, लेकिन लोहाघाट में करीब 33 साल पुराना एक प्रसंग छात्र राजनीति की अलग तस्वीर पेश करता है। वर्ष 1993 में स्वामी विवेकानंद पीजी कॉलेज के छात्रसंघ अध्यक्ष रहे भास्कर मुरारी ने तत्कालीन पिथौरागढ़ के तेज तरार जिलाधिकारी डॉ. अनूप पांडे से छात्रहित में सहयोग की मांग की। तब चंपावत जिला पिथौरागढ़ जिले का एक अंग हुआ करता था।
मुरारी ने कॉलेज के छात्रों की जरूरतों को लेकर जिलाधिकारी से एक लाख रुपये की सहायता मांगी थी। उनके शालीन और मृदु व्यवहार से प्रभावित होकर डॉ. पांडे ने न केवल एक लाख रुपये की मांग पूरी की, बल्कि अपनी ओर से एक लाख रुपये अतिरिक्त देते हुए कुल दो लाख रुपये का सहयोग किया। उन्होंने अतिरिक्त राशि को मुरारी के व्यवहार के लिए पुरस्कार बताया।
डॉ. पांडे ने अपने पास उपलब्ध पुस्तकें भी छात्रों को देने की बात कही। साथ ही गरीब विद्यार्थियों की सूची उपलब्ध कराने को कहा, ताकि उनकी जरूरत के अनुसार मदद की जा सके। उन्होंने अधिकारियों को भी निर्देश दिए कि लोहाघाट के छात्र अपनी समस्याएं लेकर आएं तो उनकी बातों को प्राथमिकता से सुना जाए।
बताया जाता है कि डॉ. अनूप पांडे ने बाद में शासन और केंद्र सरकार में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। इसके बावजूद लोहाघाट के छात्रों से जुड़ा यह प्रसंग उन्हें लंबे समय तक याद रहा। उनका मानना था कि स्वामी विवेकानंद के नाम पर संचालित महाविद्यालय के छात्रों के व्यवहार में भी उनके विचारों और संस्कारों की झलक दिखाई देती है।
वर्तमान में भास्कर मुरारी जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष हैं। छात्रसंघ अध्यक्ष के रूप में उनका यह पुराना प्रसंग आज भी छात्रहित में शालीन संवाद और सकारात्मक पहल की मिसाल के रूप में सामने आता है।
फोटो_ भास्कर मुरारी, तत्कालीन छात्रसंघ अध्यक्ष।




