चंपावत: पहाड़ की खुशबू बनी कमाई का जरिया, मसाला उद्यम से आत्मनिर्भर बनीं खलकीना की महिलाएं।

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10 लाख रुपये की परियोजना से खड़ा किया कारोबार, हर महीने 15 से 20 हजार रुपये तक की आय।

चंपावत। पहाड़ के पारंपरिक स्वाद और स्थानीय संसाधनों को रोजगार से जोड़कर बाराकोट ब्लॉक के खलकीना गांव की महिलाओं ने स्वरोजगार की नई मिसाल पेश की है। सखी स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं हल्दी, धनिया, मिर्च और जीरे जैसे मसालों की पिसाई और पैकेजिंग कर न केवल स्थानीय बाजार में अपनी पहचान बना रही हैं, बल्कि हर महीने 15 से 20 हजार रुपये तक की आय भी अर्जित कर रही हैं।

समूह की अध्यक्ष कलावती देवी के नेतृत्व में महिलाओं ने मिलकर मसाला उद्यम शुरू किया। समूह की महिलाएं स्थानीय स्तर पर कच्चा माल जुटाती हैं और उसकी पिसाई के बाद पैकेजिंग कर बाजार तक पहुंचाती हैं। शुद्धता और गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने के साथ तैयार किए जा रहे मसालों की स्थानीय बाजार में मांग बढ़ रही है।

इस उद्यम को स्थापित करने में ग्रामोत्थान योजना ने अहम भूमिका निभाई। परियोजना पर कुल 10 लाख रुपये खर्च किए गए, जिसमें छह लाख रुपये योजना के तहत आर्थिक सहायता, तीन लाख रुपये बैंक ऋण और एक लाख रुपये समूह की महिलाओं का स्वयं का योगदान शामिल है। आर्थिक सहयोग से महिलाओं को अपना कारोबार शुरू करने और आगे बढ़ाने का अवसर मिला।

मसाला कारोबार से जुड़कर महिलाएं परिवार की आमदनी बढ़ाने के साथ आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। यह पहल बताती है कि स्थानीय उत्पादों को बाजार से जोड़कर गांवों में ही रोजगार के अवसर तैयार किए जा सकते हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में संचालित ग्रामीण आजीविका और स्वरोजगार से जुड़ी योजनाओं के तहत खलकीना की महिलाओं का यह प्रयास महिला सशक्तीकरण की एक प्रेरक तस्वीर पेश करता है। पहाड़ के स्थानीय संसाधनों, महिलाओं की मेहनत और सामूहिक प्रयासों ने मसालों की खुशबू को आजीविका का साधन बना दिया है।

फोटो_खलकीना गांव में मसाला उद्यम से जुड़ी सखी स्वयं सहायता समूह की महिलाएं।


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