चंपावत: 27 सूत्रीय मांगों पर डटे डिप्लोमा इंजीनियर, अनिश्चितकालीन हड़ताल से ठप पड़े निर्माण कार्य।

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अन्य संगठनों के समर्थन से आंदोलन को मिली नई धार, ग्रेड पे और पुरानी पेंशन बहाली प्रमुख मांगें।

लोहाघाट/चंपावत। उत्तराखंड डिप्लोमा जूनियर्स महासंघ के बैनर तले 27 सूत्रीय मांगों को लेकर जिले भर के डिप्लोमा इंजीनियरों का आंदोलन अब और तेज हो गया है। लगभग एक दर्जन विभागों के अभियंता अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं, जिससे जनपद में चल रहे निर्माण कार्य पूरी तरह ठप पड़ गए हैं।
लोहाघाट और चंपावत में इंजीनियर लगातार धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। हड़ताल का असर अब साफ दिखाई देने लगा है, जहां एक ओर सरकारी परियोजनाएं रुकी हुई हैं, वहीं ठेकेदारों और श्रमिकों की परेशानियां भी बढ़ने लगी हैं।
डिप्लोमा इंजीनियरों की प्रमुख मांगों में तीन चरणों में वेतनमान निर्धारण शामिल है—10 वर्ष की सेवा पर 5400 ग्रेड पे, 16 वर्ष पर 6600 ग्रेड पे और 26 वर्ष की सेवा के बाद 8700 ग्रेड पे देने की मांग जोर पकड़ रही है। इसके अलावा पुरानी पेंशन बहाली, जल निगम और जल संस्थान के राजकीयकरण जैसी मांगें भी प्रमुख हैं। लोहाघाट के एनएफसी भवन में आयोजित सभा में वक्ताओं ने सरकार के “जिद्दी रवैये” की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि जहां जनप्रतिनिधि अपने वेतन-भत्तों में बढ़ोतरी के लिए एकजुट हो जाते हैं, वहीं डिप्लोमा इंजीनियरों की मांगों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है।
सभा की अध्यक्षता परमानंद पुनेठा ने की। इस दौरान सचिन पुनेठा, नीरज ओली, सुभाष पांडे, प्रकाश नरियाल, विशाल उप्रेती, चंदन भारद्वाज, ऋषभ शाह, संदीप कुमार, सुधीर कुमार, इंजीनियर सनी, पल्लवी शाह, अलका और रेनू समेत कई अभियंताओं ने अपने विचार रखे और चेतावनी दी कि जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा। इस बीच उत्तराखंड के विभिन्न शिक्षक संगठनों ने भी धरना स्थल पर पहुंचकर अपना समर्थन दिया है। जिला अध्यक्ष गोपाल राम कालाकोटी और महासचिव किशोर राठौड़ ने बताया कि यदि सरकार का यही रुख जारी रहा तो अन्य संगठनों का समर्थन भी आंदोलन को और व्यापक बना सकता है।

फोटो – लोहाघाट में 27 सूत्रीय मांगों को लेकर प्रदर्शन करते डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ के पदाधिकारी।


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