चंपावत: इंटर कॉलेज के अभाव में सीमांत की बेटियों का भविष्य अधर में, रोज़ 20 किमी पैदल सफर की मजबूरी!

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कन्याधन योजना से वंचित हो रहीं सीमांत की छात्राएं।

लोहाघाट। नेपाल सीमा से सटे लोहाघाट विधानसभा क्षेत्र के सीमांत गांवों में इंटरमीडिएट स्तर की शिक्षा व्यवस्था का अभाव छात्राओं के भविष्य पर भारी पड़ रहा है। इंटर कॉलेज नहीं होने के कारण दर्जनों छात्राओं को रोजाना करीब 20 किलोमीटर पैदल चलकर राजकीय इंटर कॉलेज मडलक पहुंचना पड़ता है। लंबी दूरी, दुर्गम रास्तों और आर्थिक तंगी के चलते कई छात्राएं बीच में ही पढ़ाई छोड़ने को विवश हैं। इसका असर उनकी उच्च शिक्षा के साथ-साथ राज्य सरकार की कन्याधन योजना जैसी लाभकारी योजनाओं पर भी पड़ रहा है।
डूंगरालेटी, बगोटी, जमरसौ, सलटा और बसौटा समेत कई सीमांत गांवों के छात्र-छात्राओं के लिए इंटरमीडिएट शिक्षा की कोई स्थानीय व्यवस्था नहीं है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार अपने बच्चों को लोहाघाट अथवा मैदानी क्षेत्रों में पढ़ाने का खर्च वहन करने में असमर्थ हैं। ऐसे में सीमांत क्षेत्र के बच्चों के लिए शिक्षा एक बड़ी चुनौती बन गई है।
सामाजिक एवं भाजपा कार्यकर्ता प्रवीण पांडे ने बताया कि इस समस्या को लेकर कई बार मुख्यमंत्री का ध्यान आकर्षित किया गया, लेकिन आज तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया। उन्होंने मांग की कि अन्य क्षेत्रों की तर्ज पर जिला खनन न्यास निधि (डीएमएफ) से छात्र-छात्राओं के लिए नियमित परिवहन सुविधा उपलब्ध कराई जाए, ताकि उनकी पढ़ाई बाधित न हो।
उन्होंने कहा कि जनसंपर्क के दौरान ग्रामीणों में इस मुद्दे को लेकर भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। ग्रामीणों का कहना है कि जब बच्चों की शिक्षा की बुनियादी व्यवस्था ही नहीं है, तो विकास के दावों का कोई अर्थ नहीं रह जाता। उन्होंने सरकार से सीमांत क्षेत्र में इंटर कॉलेज की स्थापना अथवा स्थायी परिवहन व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।

फोटो_ स्कूली छात्र-छात्राओं के साथ भाजपा कार्यकर्ता  प्रवीण पांडे।


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