

2022 की हार से सबक लेने की नसीहत, कार्यकर्ताओं की नाराजगी पर संगठन को घेरा।
चंपावत। लोहाघाट विधानसभा में 2027 के चुनाव से पहले भाजपा के भीतर संगठन को लेकर उठ रहे सवालों ने सियासी हलचल बढ़ा दी है। भाजपा मीडिया पैनलिस्ट राजेश बिष्ट ने पार्टी की गुटबाजी को लेकर खुलकर अपनी बात रखते हुए संगठन को समय रहते हालात संभालने की नसीहत दी है। उनका कहना है कि 2022 में मिली करीबी हार के पीछे अंदरूनी खींचतान भी एक वजह रही और यदि इस कमजोरी को दूर नहीं किया गया तो आगामी चुनाव में भी इसका असर पड़ सकता है।
बिष्ट ने कहा कि 2022 में भाजपा कुछ हजार मतों के अंतर से चुनाव हारी थी। ऐसे में हार के कारणों की गंभीर समीक्षा और संगठनात्मक कमियों को दूर करना जरूरी था। उन्होंने 2025 के पंचायत चुनाव में पाटी विकासखंड में गुटीय राजनीति के असर का भी उल्लेख किया।
उनके मुताबिक चुनावी जीत केवल सरकार की उपलब्धियों के सहारे हासिल नहीं होती। बूथ पर खड़ा कार्यकर्ता ही संगठन की असली ताकत है। यदि वही उपेक्षित या नाराज महसूस करेगा तो चुनावी रणनीति कमजोर पड़ सकती है।
बिष्ट ने पुराने कार्यकर्ताओं की कथित उपेक्षा और दूसरे दलों से आने वाले नेताओं को प्राथमिकता दिए जाने के मुद्दे पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पिछले साढ़े चार वर्षों में 400 से अधिक मीडिया डिबेट में भाग लेने और सरकार की योजनाओं को जनता तक पहुंचाने का दावा करते हुए कहा कि संगठन को कार्यकर्ताओं की भूमिका और सम्मान पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।
विधायक अधिकारी पर भी साधा निशाना_
बिष्ट ने कांग्रेस विधायक खुशाल सिंह अधिकारी पर भी हमला बोला। उन्होंने क्षेत्र में विकास कार्यों और विधायक की कार्यशैली को लेकर सवाल उठाए। हालिया प्रशासनिक विवाद और महिला अधिकारी के साथ कथित अभद्र व्यवहार के मामले को लेकर भी उन्होंने विधायक को घेरा।

भाजपा के सामने अब दोहरी चुनौती है। एक ओर सरकार की विकास योजनाओं को जनता तक पहुंचाने की जिम्मेदारी है तो दूसरी ओर संगठन के भीतर उठ रहे सवालों का समाधान करना है।
2027 की जंग में अभी वक्त है, लेकिन बिष्ट की खरी-खरी ने भाजपा को साफ संकेत दे दिया है-अगर घर की नाराजगी नहीं संभली तो चुनावी मैदान में विपक्ष से पहले संगठन की कमजोरी भारी पड़ सकती है।
फोटो_राजेश बिष्ट।



