चंपावत। मानसून के आगमन से पहले चंपावत जिला प्रशासन तैयारियों को लेकर पूरी तरह सक्रिय नजर आ रहा है। शहर की सड़कों के किनारे नालियों की सफाई कर जलभराव की समस्या से लोगों को राहत दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं। प्रशासन की ओर से नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए कार्रवाई भी की जा रही है। हाल ही में नगर पालिका ने सड़क किनारे निर्माण कार्य कर रहे एक निजी भवन स्वामी पर तीन हजार रुपये का चालान भी किया।
लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन की सख्ती सभी के लिए समान है?
जिस क्षेत्र में एक निजी निर्माणकर्ता पर कार्रवाई की गई, उसी के आसपास एक सरकारी पार्किंग परियोजना का निर्माण कार्य जारी है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस निर्माण के कारण कई स्थानों पर नालियां अवरुद्ध हो गई हैं, जिससे बरसात के दौरान जलभराव का खतरा बढ़ गया है। इसके अलावा निर्माण स्थल से उड़ रही धूल और मलबा राहगीरों, मरीजों और स्थानीय निवासियों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इस संबंध में कई बार प्रशासन और संबंधित विभागों का ध्यान आकर्षित कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई दिखाई नहीं दी। ऐसे में प्रशासन की कार्यशैली और नियमों के समान अनुपालन को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि यह स्थान शहर के सबसे व्यस्त इलाकों में से एक है। यहां बड़ी संख्या में आबादी निवास करती है। इसके साथ ही जिला अस्पताल, स्थानीय बाजार, मॉल तथा नगर और मैदान को जोड़ने वाली मुख्य सड़क भी इसी मार्ग से होकर गुजरती है। प्रतिदिन सैकड़ों स्थानीय नागरिकों के साथ-साथ बड़ी संख्या में पर्यटक भी इस मार्ग का उपयोग करते हैं।
ऐसे में निर्माण कार्य से उत्पन्न अव्यवस्था न केवल आम जनता को प्रभावित कर रही है, बल्कि चंपावत आने वाले पर्यटकों के सामने भी शहर की व्यवस्थाओं की नकारात्मक तस्वीर प्रस्तुत कर रही है।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन निजी और सरकारी निर्माण कार्यों के प्रति एक समान दृष्टिकोण अपनाते हुए लोगों की शिकायतों का समाधान कब तक करता है।
