चंपावत: तीन सितंबर को भ्रष्टाचार का आरोप, छह दिन बाद एपीडी को बताया ईमानदार।

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विधायक खुशाल अधिकारी के बदले सुरों से पुनोली जांच फिर सवालों के घेरे में।

चंपावत। पाटी विकासखंड की पुनोली ग्रामसभा में फार्म मशीनरी बैंक और महिला समूहों से जुड़ा कथित अनियमितता प्रकरण अब नया मोड़ लेता नजर आ रहा है। तीन सितंबर को जिला मुख्यालय में भ्रष्टाचार, कमीशनखोरी और अनियमितता के आरोपों को लेकर गरमाए मामले में छह दिन बाद विधायक खुशाल सिंह अधिकारी ने उप परियोजना निदेशक (एपीडी) को ईमानदार अधिकारी बताते हुए अपना पक्ष स्पष्ट किया है। विधायक के बदले रुख के बाद अब जांच प्रक्रिया को लेकर सवाल और गहरा गए हैं।



विधायक के मुताबिक उनका आक्रोश किसी अधिकारी की ईमानदारी को लेकर नहीं, बल्कि करीब तीन महीने से लंबित जांच को लेकर था। उनका कहना है कि पुनोली मामले में लगातार जांच की मांग की जाती रही, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। उच्च अधिकारियों से बातचीत के बाद पता चला कि प्रकरण एपीडी स्तर तक प्रभावी रूप से पहुंचा ही नहीं था और दूसरे स्तर पर लंबित रहा।
विधायक ने जांच में देरी के लिए उसी दिन स्थानांतरित हुए अधिकारी जीएस खाती को जिम्मेदार बताया है। वहीं अब एपीडी की ओर से पांच दिन के भीतर जांच पूरी कर रिपोर्ट उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया है।

विधायक ने कहा कि जांच पूरी होने से पहले किसी व्यक्ति को व्यक्तिगत रूप से भ्रष्टाचारी कहना उचित नहीं है। उन्होंने एपीडी को ईमानदार अधिकारी बताते हुए कहा कि यदि पुनोली की लाभार्थी महिलाएं योजना से संतुष्ट हैं और उन्हें सभी मशीनरी व उपकरण उपलब्ध हो चुके हैं तो वह अपने आरोपों पर दस बार माफी मांगने को तैयार हैं।
हालांकि उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि केवल मशीनरी और उपकरणों की तस्वीरें दिखा देना पर्याप्त नहीं है। जांच में यह भी देखा जाना चाहिए कि उपकरण वास्तव में लाभार्थी समूहों के पास हैं या नहीं, उनका इस्तेमाल हो रहा है या नहीं और योजना से महिलाओं को वास्तविक लाभ मिला या नहीं।

तीन महीने की देरी पर सवाल कायम_

तीन सितंबर वाला मामला ग्राम प्रधानों के प्रदर्शन और विधायक के आरोपों के बाद शुरू हुआ विवाद अब पांच दिन में जांच पूरी करने के आश्वासन तक पहुंच गया है। इसके बावजूद सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब शिकायत तीन महीने पुरानी थी तो जांच समय पर क्यों नहीं हुई? मामला किस स्तर पर लंबित रहा और इसकी जिम्मेदारी किसकी थी?
अब पांच दिन में होने वाली जांच पर सभी की निगाहें टिकी हैं। जांच रिपोर्ट से पुनोली प्रकरण की वास्तविक स्थिति सामने आने के साथ ही यह भी स्पष्ट होगा कि मामले में कथित अनियमितता थी या फिर प्रशासनिक स्तर पर हुई देरी ने पूरे विवाद को तूल दिया।

फोटो/क्लिप_ विधायक खुशाल सिंह अधिकारी, पुनोली जांच प्रकरण पर अपना पक्ष रखते हुए।


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