पहाड़ की सदियों पुरानी पहचान पर संकट, घराटों की घरघराहट हुई खामोश।
देहरादून/चंपावत। कभी पहाड़ के गांवों की सुबह घराट की घरघराहट से हुआ करती थी। गाड़-गधेरों और नदियों के किनारे पानी की धार से चलने वाले घराट ग्रामीण जीवन का अभिन्न हिस्सा थे। गेहूं, मक्का और मड़ुवा जैसे अनाज की पिसाई के साथ ये घराट पहाड़ की आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पारंपरिक तकनीक की पहचान भी…


